कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए बनाई गई मौजूदा योजनाओं को गंभीरता से लागू करे और सुनिश्चित करे कि राहत और मुआवजा प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो। साथ ही, न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित रहेंगी, तो उनका कोई वास्तविक लाभ नहीं होगा।
इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए कोर्ट ने सरकार से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है कि अब तक किन राज्यों में योजनाओं को कैसे और किस स्तर तक लागू किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।
