(India)
भारत में क्विक कॉमर्स सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है, और CAREEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए उपभोक्ताओं ने लगभग ₹64,000 करोड़ का सामान ऑर्डर किया, जो पिछले वर्ष के ₹30,000 करोड़ के मुकाबले दोगुना से भी अधिक है। इसी अवधि में इन प्लेटफॉर्म्स ने शुल्क के माध्यम से ₹10,500 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो FY22 के ₹450 करोड़ से उल्लेखनीय वृद्धि है। रिपोर्ट का अनुमान है कि FY28 तक कुल सकल ऑर्डर मूल्य (GOV) बढ़कर ₹2 लाख करोड़ और राजस्व ₹34,500 करोड़ तक पहुँच सकता है। टेक रेट भी FY25 में बढ़कर 18% हो गया, जो पहले 7–9% था। प्लेटफॉर्म्स अब हाइपरग्रोथ से हटकर मुनाफे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, प्राइवेट लेबल और तकनीकी इन्वेंटरी ऑप्टिमाइजेशन जैसे माध्यमों से लाभप्रदता बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की कुल किराना मांग का केवल 1% हिस्सा ही क्विक कॉमर्स में आया है, लेकिन उपभोक्ताओं की सुविधा की ओर बढ़ती रुचि और तकनीकी नवाचार से टियर-2 और टियर-3 शहरों में तेज विकास की संभावना है। 2024 में भारत में 270 मिलियन से अधिक ऑनलाइन खरीदार थे और ई-कॉमर्स बाजार 23.8% की दर से बढ़ा, जबकि मोबाइल कनेक्शन की संख्या 1.12 अरब से अधिक रही। इस वृद्धि में डार्क स्टोर्स की अहम भूमिका रही, जिनकी संख्या FY25 में 70% बढ़कर 3,072 हो गई, जिससे त्वरित डिलीवरी की क्षमता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
Author: JAN TV Editorial Team
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