(India)
बैंक ऑफ बड़ौदा की ताजा रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोग से जुड़ी मांग में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा और विनिर्माण पीएमआई, डीज़ल की खपत, वाहन पंजीकरण, राज्यों का टैक्स कलेक्शन और ई-वे बिल जैसी गतिविधियों में तेजी आई है, जो समग्र आर्थिक सुधार को दर्शाते हैं। देश में खुदरा महंगाई काबू में है, जिससे ब्याज दरों को लेकर नरम रुख बनाए रखने की संभावना मजबूत हुई है। इस्पात की खपत और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के आयात में इजाफा हुआ है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक मांग की मजबूती का संकेत देता है। साथ ही, केंद्र सरकार के खर्च में बढ़ोतरी और सामान्य से बेहतर मानसून (जो अब तक औसत से 15% अधिक रहा है) ग्रामीण क्षेत्रों में मांग को सहारा देने में मददगार हो सकते हैं। पूंजीगत निवेश, परियोजना घोषणाओं और मशीनरी उत्पादन जैसे संकेतकों ने भी सुधार का रुख दिखाया है। हालांकि, मनरेगा में काम की मांग में गिरावट, दोपहिया वाहन बिक्री में कमी और एफएमसीजी व टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में धीमापन कुछ चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। इसके बावजूद, जुलाई में भारतीय रुपया स्थिर बना रहा है और निवेशकों को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले सकारात्मक नतीजों की उम्मीद है, जो रुपये को और समर्थन दे सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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