ग्लोबल चुनौतियों के बीच भारतीय कंपनियों की मजबूती पर फिच को भरोसा
(India) रेटिंग एजेंसी फिच ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.4% से घटाकर 6.3% कर दिया है। शुक्रवार को जारी अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने यह बदलाव वैश्विक अनिश्चितताओं और व्यापारिक जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किया है। हालांकि, इसके बावजूद भारतीय कॉरपोरेट जगत को लेकर फिच का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
इंडिया कॉरपोरेट्स क्रेडिट ट्रेंड्स नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2026 तक समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में भारतीय कंपनियों के क्रेडिट मेट्रिक्स में सुधार देखने को मिलेगा। इसके पीछे का कारण बताया गया है – बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन जो कंपनियों के ऊंचे पूंजीगत खर्च (High Capex) को संतुलित करने में सक्षम होगा।
फिच के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर हो रहे सरकारी निवेश से सीमेंट, स्टील, पावर, पेट्रोलियम और इंजीनियरिंग कंपनियों की मांग में मजबूती बनी रहेगी। यही नहीं, स्थानीय बाजारों पर निर्भर तेल, गैस, दूरसंचार और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र पर अमेरिकी टैरिफ का प्रत्यक्ष प्रभाव भी बहुत सीमित रहेगा।
हालांकि, अमेरिका द्वारा घोषित नए टैरिफ के चलते निर्यात आधारित आईटी, ऑटो पार्ट्स और फार्मा क्षेत्रों को कुछ दबाव का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन क्षेत्रों में अमेरिका और यूरोप की मांग में गिरावट आने की आशंका है, जिससे भविष्य की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
टैरिफ के असर से निपटने के लिए भारतीय कंपनियां अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने पर ध्यान दे रही हैं। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में भी बातचीत जारी है, जहां भारत ने डेयरी और कृषि उत्पादों पर टैरिफ में छूट की अमेरिकी मांग का विरोध किया है।
इस बीच, स्टील और केमिकल सेक्टर को अतिरिक्त आपूर्ति के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। धातु और खनन जैसे क्षेत्रों में भी वैश्विक नीति अनिश्चितताओं के कारण अस्थिरता बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, जीडीपी अनुमान में मामूली गिरावट के बावजूद फिच को उम्मीद है कि भारतीय कंपनियां अपनी वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाए रखते हुए वैश्विक दबावों का सामना करने में सक्षम रहेंगी।

Author: JAN TV Editorial Team

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