कंपाउंड फीड उद्योग संगठन के अनुसार, यह नया शुल्क भारतीय समुद्री निर्यात क्षेत्र के लिए एक कठिन चुनौती है। उद्योग जगत अब सक्रिय रूप से ब्रिटेन और अन्य संभावित बाजारों की तलाश में जुट गया है, जिससे अमेरिकी बाजार पर निर्भरता को कम किया जा सके।
> ब्रिटेन बना उम्मीद की किरण
भारतीय निर्यातकों को विश्वास है कि भारत और ब्रिटेन के बीच आगामी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत मत्स्य उत्पादों को शुल्क मुक्त पहुंच मिलने की स्थिति में, ब्रिटेन को निर्यात तीन गुना तक बढ़ सकता है। इससे अमेरिका से होने वाली आय में आई कमी की आंशिक भरपाई संभव मानी जा रही है।
> सरकार से रणनीतिक समर्थन की अपेक्षा
उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से आग्रह किया है कि वह पूर्वी एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों में व्यापार पहुंच को और अधिक सुगम बनाए। इसके लिए WTO और G-20 जैसे वैश्विक मंचों का उपयोग कर व्यापार कूटनीति को तेज़ करने की आवश्यकता बताई गई है।
> ब्याज सहायता योजना बहाल करने की मांग
निर्यातकों ने यह भी मांग की है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए ब्याज सब्सिडी योजना (IES) को फिर से शुरू किया जाए और उसका दायरा बढ़ाया जाए। इसके अलावा, स्थायी जलवायु-अनुकूल मछली पालन, प्रसंस्करण सुविधाओं के आधुनिकीकरण, मैंग्रोव वनों का संरक्षण, और एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोग पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी जोर दिया गया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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