भविष्य की उड़ानें होंगी पर्यावरण मित्र: SAF उत्पादन में भारत ने बढ़ाया कदम
(India) भारत में पहली बार इस्तेमाल हो चुके कुकिंग ऑयल से हवाई जहाज उड़ाने का रास्ता खुल गया है। इंडियन ऑयल की पानीपत रिफाइनरी ने टिकाऊ एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल कर ली है। इस उपलब्धि के बाद कंपनी सालाना लगभग 35 हज़ार टन जैव-आधारित विमानन ईंधन का उत्पादन शुरू करेगी।
> कैसे तैयार होगा ईंधन
इंडियन ऑयल होटल चेन, रेस्टोरेंट्स और स्नैक कंपनियों जैसे बड़े उपभोक्ताओं से इस्तेमाल किया गया कुकिंग ऑयल इकट्ठा करती है। इस तेल को पानीपत रिफाइनरी में प्रोसेस करके जेट फ्यूल में बदल दिया जाएगा। हालांकि, छोटे स्तर के उपयोगकर्ताओं और घरों से तेल इकट्ठा करना अब भी सबसे बड़ी चुनौती है।
> SAF क्या है?
SAF यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, एक वैकल्पिक विमानन ईंधन है, जो पारंपरिक पेट्रोलियम पर आधारित नहीं होता। इसे बायोमास, अपशिष्ट तेल, शैवाल, कृषि अवशेष और यहां तक कि औद्योगिक कचरे से भी बनाया जा सकता है। इसे जेट फ्यूल में 50% तक मिलाया जा सकता है।
> भारत की तैयारी
भारत सरकार ने 2027 से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बेचे जाने वाले जेट ईंधन में 1% SAF मिश्रण अनिवार्य कर दिया है। स्पाइसजेट और इंडिगो जैसी एयरलाइंस पहले ही SAF के साथ टेस्ट उड़ानें कर चुकी हैं।
>फायदे
*SAF पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में 60% से 80% तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटा सकता है।
*धूलकण और सल्फर उत्सर्जन लगभग पूरी तरह से खत्म हो जाता है।
*कार्बन का चक्र संतुलित रहता है, यानी पर्यावरण पर कुल असर कम होता है।
>चुनौतियां
फिलहाल SAF उत्पादन बहुत सीमित है और यह दुनिया भर में कुल जेट फ्यूल का केवल 0.3% हिस्सा है। इसके अलावा यह पारंपरिक ईंधन से दो से तीन गुना महंगा है। पर्याप्त मात्रा में फीडस्टॉक उपलब्ध कराना भी एक बड़ी बाधा है।

Author: JAN TV Editorial Team

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