-> पहला विधेयक: केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन), 2025
यह विधेयक वर्तमान जीएसटी क्षतिपूर्ति सेस की जगह लेगा। इसका उद्देश्य है कि सेस खत्म होने के बाद भी सरकार को तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने की वित्तीय क्षमता मिलती रहे।
> सिगरेट/सिगार/चिरूट पर प्रस्तावित शुल्क: ₹5,000 – ₹11,000 प्रति 1,000 स्टिक
> बिना प्रसंस्कृत तंबाकू: 60–70% तक उत्पाद शुल्क
> निकोटिन/इनहेलेशन आधारित उत्पाद: 100% उत्पाद शुल्क
अभी तक सिगरेट पर 5% एड-वैलोरम के साथ ₹2,076 से ₹3,668 प्रति 1,000 स्टिक तक क्षतिपूर्ति सेस लगता था।
* क्षतिपूर्ति सेस खत्म होने का असर
सेस समाप्त होने के बाद:
> तंबाकू/सिगरेट पर 40% जीएसटी + केंद्रीय उत्पाद शुल्क
> पान मसाला पर 40% जीएसटी + नया स्वास्थ्य सुरक्षा उपकर
यही नया ढांचा कुल टैक्स भार को पहले जैसा बनाए रखेगा।
-> दूसरा विधेयक: स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर, 2025
इस विधेयक से सरकार को पान मसाला जैसे उत्पादों पर नया सेस लगाने का अधिकार मिलेगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य उत्पाद भी इसके दायरे में लाए जा सकेंगे।
- विरोध भी हुआ
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि तंबाकू के नुकसान का जिक्र विधेयक में नहीं है और सेस की राशि राज्यों के साथ साझा नहीं की जाती, इसलिए यह राज्यों के हित में नहीं है।
क्यों लाया गया नया ढांचा
> 2017 में राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए लगाया गया क्षतिपूर्ति सेस अब मार्च 2026 तक ही मान्य है।
> केंद्र द्वारा कोविड काल में लिए गए कर्ज की भरपाई 2025 के अंत तक पूरी हो जाएगी।
> इसके बाद सेस हट जाएगा, इसलिए नया कर ढांचा जरूरी था।
नए विधेयक यह सुनिश्चित करेंगे कि तंबाकू और पान मसाला पर टैक्स का कुल बोझ समान रहे, ताकि सरकार को राजस्व नुकसान न हो और अवगुण वस्तुओं पर कठोर टैक्स नीति जारी रहे।
Author: JAN TV Editorial Team
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