मुख्य न्यायाधीश Devendra Kumar Upadhyaya और न्यायमूर्ति Tejas Karia की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता, जो एसएसबी का एक जवान है, ने फिल्म में कथित रूप से सामरिक और संवेदनशील जानकारी उजागर होने को लेकर जो चिंता जताई है, उसे पूरी तरह बेबुनियाद नहीं कहा जा सकता।
अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि फिल्मों का उद्देश्य भले ही मनोरंजन हो, लेकिन उनके सामाजिक और सुरक्षा संबंधी प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड के पास स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए और इस मामले में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
अदालत ने आदेश दिया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और CBFC पूरी याचिका को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन के रूप में लेकर उस पर उचित निर्णय लें और संबंधित पक्ष को इसकी जानकारी दें।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि फिल्म में खुफिया अभियानों, संवेदनशील स्थानों और ‘डीप कवर’ एजेंटों से जुड़ी जानकारी विस्तार से दिखाई गई है, जो सरकारी गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन कर सकती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ दृश्यों में “क्लासिफाइड प्रोटोकॉल” और अंडरकवर एजेंटों की पहचान को उजागर किया गया है, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। याचिका में फिल्म के प्रमाण पत्र को रद्द करने और इसके प्रसारण पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
Author: JAN TV Editorial Team
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