बाग से विदेशी बाजार तक मजबूत हुई निर्यात श्रृंखला
प्रदेश में लखनऊ, सहारनपुर, अमरोहा, गोरखपुर और वाराणसी के पैक हाउस आम के निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यहां आम की छंटाई, ग्रेडिंग, ट्रीटमेंट और पैकेजिंग के बाद उसे निर्यात के लिए तैयार किया जाता है। मंडी परिषद के पैक हाउस में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हॉट वाटर ट्रीटमेंट और वेपर हीट ट्रीटमेंट की सुविधाएं उपलब्ध हैं। एपीडा और उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के समन्वय से पैक हाउस का प्रमाणीकरण भी कराया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर आम को विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में मदद मिल रही है।
विदेशी बाजार में चौसा की सबसे अधिक हिस्सेदारी
प्रदेश से निर्यात होने वाले आम में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत बताई गई है। इसकी बेहतर टिकाऊ क्षमता और अपेक्षाकृत लंबी शेल्फ लाइफ इसे लंबी दूरी के बाजारों के लिए अनुकूल बनाती है। दशहरी की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत और रटौल की करीब 15 प्रतिशत है। मलीहाबाद का दशहरी अपनी मिठास और खुशबू, बागपत का रटौल अपने विशिष्ट स्वाद और सुगंध तथा बनारसी लंगड़ा अपने खास स्वाद के लिए पहचाना जाता है। आम्रपाली और पूर्वांचल के गवरजीत को भी व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
650 फार्म हॉर्टीनेट से जुड़े
एपीडा और उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के प्रयासों से इस वर्ष करीब 650 आम उत्पादक फार्मों का हॉर्टीनेट पर पंजीकरण कराया गया है। यह एपीडा की ट्रेसबिलिटी प्रणाली है, जिसके माध्यम से निर्यात होने वाले आम को उत्पादक फार्म से लेकर पैक हाउस और निर्यात तक ट्रैक किया जा सकता है। इससे गुणवत्ता नियंत्रण और निर्यात मानकों के अनुपालन को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यूरोप जैसे कड़े मानकों वाले बाजारों तक यूपी के आम की पहुंच बढ़ाने में भी यह व्यवस्था सहायक हो सकती है।
15 लाख मैंगो कवर से गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश मंडी परिषद ने इस वर्ष पहली बार फल उत्पादकों को 15 लाख मैंगो कवर उपलब्ध कराए हैं। इन विशेष कवर से आम को कीटों, दाग-धब्बों और प्रतिकूल मौसम के प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है। इससे बेहतर गुणवत्ता वाले फल तैयार करने और निर्यात योग्य उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन मिल रहा है।
निर्यातकों को भाड़े और मार्केटिंग पर प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति 2025-30 के तहत हवाई, समुद्री और सड़क मार्ग से निर्यात करने पर कुल भाड़े का 25 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। एक निर्यातक को सालाना अधिकतम 20 लाख रुपये तक लाभ मिल सकता है। इसके अलावा ट्रेड फेयर, बायर-सेलर मीट, डिजिटल मार्केटिंग और निर्यात प्रमाणन जैसी अनुमन्य गतिविधियों पर 75 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान है। निर्यात के नए रास्ते तलाशते हुए जुलाई में अमरोहा से 12.5 मीट्रिक टन दशहरी और लंगड़ा आम की खेप रीफर कंटेनर के जरिए समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई।
पांच साल में 90,844 क्विंटल आम का निर्यात
डीजीसीआईएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश से कुल 9,084.41 मीट्रिक टन यानी 90,844 क्विंटल आम का निर्यात हुआ। वर्षवार निर्यात में 2021-22 में 4,122.79 मीट्रिक टन, 2022-23 में 527.59 मीट्रिक टन, 2023-24 में 567.62 मीट्रिक टन, 2024-25 में 396.64 मीट्रिक टन और 2025-26 में 3,469.77 मीट्रिक टन आम शामिल रहा।
मंडी निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए पैक हाउस और निर्यात सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। चौसा, दशहरी, रटौल और लंगड़ा के साथ आम्रपाली और गवरजीत को भी बड़े बाजारों से जोड़ने पर जोर है, ताकि प्रदेश के आम की अंतरराष्ट्रीय पहचान बढ़े और किसानों के लिए बाजार के नए अवसर विकसित हों।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।