अयोध्या की ऐतिहासिक यात्रा पर विशेष प्रदर्शनी, 8-9 नवंबर को आमजन के लिए खुली
(UTTARPRADESH, UTTARPRADESH) भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान की ऐतिहासिक यात्रा अब विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों के सामने होगी। दीपोत्सव-2026 के अवसर पर रामकथा पार्क में ‘अयोध्या: आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान’ शीर्षक से प्रदर्शनी आयोजित की गई है। इसमें अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत से लेकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा तक की यात्रा को ऐतिहासिक दस्तावेजों, दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों और मानचित्रों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह प्रदर्शनी 8 और 9 नवंबर को आम जनता के लिए खुली रहेगी।

प्राचीन विरासत से 1528 के ऐतिहासिक प्रसंगों तक की झलक

प्रदर्शनी की शुरुआत अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से होगी। इसमें संस्कृत ग्रंथों और पांडुलिपियों के माध्यम से विशेष रूप से 'अयोध्या माहात्म्य' में वर्णित नगरी की महिमा, सूर्यवंश की परंपरा और मां सरयू के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाया गया है।

इसके बाद वर्ष 1528 से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों, श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित सिख परंपरा तथा 1855 और 1858 की घटनाओं को अभिलेखीय दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया जाएगा। महंत रघुबर दास की ओर से 1885 में दायर मुकदमे और वर्ष 1949 की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया है।

राम जन्मभूमि आंदोलन और गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों का योगदान

प्रदर्शनी में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध तरीके से दिखाया जाएगा। इसमें गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों- महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ और महंत योगी आदित्यनाथ के योगदान को शामिल किया गया है।

इसके साथ ही धर्म संसद, राम-जानकी रथयात्रा, रामशिला पूजन, वर्ष 1990 की कारसेवा और 1992 के घटनाक्रम को भी प्रदर्शित किया जाएगा। वर्ष 1993 में भूमि अधिग्रहण, पुरातात्विक सर्वेक्षण और उत्खनन से जुड़े प्रसंग भी दर्शक देख सकेंगे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक की यात्रा

श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े न्यायिक सफर को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इसमें वर्ष 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से लेकर 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए निर्णय तक की यात्रा को क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। अभिलेखीय दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए दर्शक मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न पड़ावों को जान सकेंगे।

राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा तक के पड़ाव

प्रदर्शनी के अंतिम हिस्से में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ावों को दिखाया जाएगा। इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन, 5 अगस्त 2020 को मंदिर निर्माण के लिए हुआ भूमिपूजन, मंदिर की स्थापत्य एवं शिल्पकला और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा शामिल है।

इसके अलावा 25 नवंबर 2025 को धर्मध्वजा आरोहण, 19 मार्च 2026 को श्रीराम यंत्र की स्थापना और अयोध्या के दीपोत्सव की यात्रा को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

विद्यार्थियों, शोधार्थियों और श्रद्धालुओं के लिए खास अवसर

दुर्लभ अभिलेखों, ऐतिहासिक चित्रों, पांडुलिपियों, दस्तावेजों और मानचित्रों के माध्यम से तैयार यह प्रदर्शनी अयोध्या के इतिहास को दृश्य रूप में समझने का अवसर देगी। इसका मूल भाव ‘आस्था की अनंत धारा, इतिहास की अमर गाथा’ रखा गया है।

8 और 9 नवंबर को रामकथा पार्क में आयोजित इस प्रदर्शनी का अवलोकन आम नागरिकों के साथ शोधार्थी, विद्यार्थी, इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु कर सकेंगे। प्रदर्शनी में प्रवेश जनसामान्य के लिए खुला रहेगा।
DISCLAIMER:

इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।