50 फीट लंबी और 20 फीट ऊंची है कलाकृति
रेत से बनाई जा रही राम दरबार की यह कलाकृति 50 फीट लंबी और 20 फीट ऊंची है। इसकी विशालता और बारीक कलात्मक संरचना इसे खास बना रही है। बिहार के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार अपने सहयोगियों के साथ इसे भव्य स्वरूप देने में जुटे हैं।
इस कलाकृति के जरिए कलाकार अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को रेत पर जीवंत कर रहे हैं। इसमें राम मंदिर की संरचना के साथ राम परिवार की आकृतियों को विशेष रूप से उकेरा जा रहा है।
रेत पर दिखेगा आस्था और विश्व शांति का संदेश
सैंड आर्ट के माध्यम से रामायण की भावभूमि और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कलाकृति के जरिए विश्व शांति, प्रेम और आपसी सद्भाव का संदेश भी दिया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, कलाकृति की विशालता को देखते हुए इसे विश्व रिकॉर्ड में स्थान दिलाने के लिए आवेदन किया गया है। दीपोत्सव के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह विशेष आकर्षण होगी।
35 हजार से अधिक कलाकृतियां बना चुके हैं मधुरेंद्र कुमार
सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने बताया कि वह अब तक 35 हजार से अधिक कलाकृतियों का निर्माण कर चुके हैं। उनकी कला केवल रेत तक सीमित नहीं है। उन्होंने राख, पत्तियों, पत्थर, धातु और फल-सब्जियों जैसी विभिन्न सामग्रियों से भी कलाकृतियां बनाई हैं।
मधुरेंद्र जर्मनी, जापान, रूस, अमेरिका, नेपाल और भूटान सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
भगवान बुद्ध के जीवन पर बना चुके हैं 50 रेत प्रतिमाएं
मधुरेंद्र कुमार को यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिल चुका है। उन्होंने भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित 50 अलग-अलग रेत प्रतिमाओं का निर्माण किया था। उनकी कलाकृतियां सामाजिक और वैश्विक संदेशों को कला के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं।
अयोध्या में तैयार हो रहा राम दरबार भी इसी कलात्मक परंपरा का हिस्सा है। इसमें भारतीय संस्कृति, आस्था और विश्व बंधुत्व का संदेश समाहित किया गया है।
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