प्रदेश के प्रत्येक मंडल में दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित सामग्रियों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मेले आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत लखनऊ मंडल के लिए सात लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जबकि प्रदेश के अन्य प्रत्येक मंडल को आयोजन के लिए तीन-तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।
विभाग ने सभी मंडलों के उपनिदेशकों और जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मेले के आयोजन की तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही शेष मंडलों और जनपदों से आयोजन संबंधी प्रस्ताव जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इन मेलों के माध्यम से दिव्यांगजनों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित वस्तुओं और अन्य उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। उन्हें अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार, बिक्री और नए ग्राहक बनाने के लिए मंच उपलब्ध होगा। इससे उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलने के साथ आय के नए अवसर भी पैदा हो सकेंगे।
सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल सरकारी सहायता पर निर्भर रखने के बजाय उनके कौशल और मेहनत के आधार पर सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। मंडल स्तर पर आयोजित होने वाले ये मेले स्वरोजगार को बढ़ावा देने और दिव्यांगजनों की आर्थिक भागीदारी मजबूत करने की दिशा में कदम हैं।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के निदेशक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनकी प्रतिभा और कौशल को उचित मंच उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से सभी मंडलों में दीपावली मेले आयोजित कराने की पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि मेलों में दिव्यांगजनों द्वारा तैयार उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी, जिससे उन्हें बेहतर बाजार मिल सकेगा। इससे उनकी आय के नए अवसर पैदा होंगे और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आयोजन की तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
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