यह लगातार पांचवां महीना है, जब नकारात्मक एफपीएएएस के माध्यम से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत दी जा रही है। बिजली खरीद और ईंधन की वास्तविक लागत कम होने का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
यूपीपीसीएल के मुताबिक, पिछले चार महीनों में भी उपभोक्ताओं को एफपीएएएस के तहत राहत दी गई थी। जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत, सितंबर में 7.93 प्रतिशत और अक्टूबर में 5.24 प्रतिशत की राहत मिली थी। अब नवंबर में यह बढ़कर 9.17 प्रतिशत हो गई है।
लगातार पांच महीनों से मिल रही इस राहत से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में कमी का लाभ मिलने की उम्मीद है।
एफपीएएएस व्यवस्था के तहत बिजली खरीद और ईंधन की वास्तविक लागत निर्धारित टैरिफ में शामिल लागत से कम होने पर उसका लाभ उपभोक्ताओं को बिल में राहत के रूप में दिया जाता है। यूपीपीसीएल इसी व्यवस्था के तहत लागत में कमी का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली खरीद की लागत में होने वाले बदलावों के अनुरूप बिल में समायोजन करना है, ताकि उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों के तहत राहत मिल सके।
नवंबर के बिजली बिल में दी जाने वाली राहत घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणियों के पात्र उपभोक्ताओं पर लागू होगी। इससे अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने की उम्मीद है।
यूपीपीसीएल ने उपभोक्ता सेवाओं को बेहतर बनाने, पारदर्शी बिलिंग और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। लगातार पांच महीनों से एफपीएएएस के तहत दी जा रही राहत को बिजली खरीद लागत के प्रबंधन और उपभोक्ता हितों से जुड़ा कदम बताया गया है।
Digital Desk: Liza Chandel
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