मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में लिखा कि लाखों दीपों की अलौकिक आभा से जगमगाते सरयू तट, रामायण के प्रसंगों को जीवंत करती झांकियां, भव्य शोभायात्राएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां त्रेतायुग की स्मृतियों को फिर से जीवंत करेंगी। उन्होंने कहा कि हर दीप प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा का प्रतीक होगा और हर लौ सनातन संस्कृति के गौरव का उद्घोष करेगी।
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में वर्ष 2017 से पहले अयोध्या की स्थिति को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय रामनगरी उपेक्षा, अव्यवस्था और बदहाली का सामना कर रही थी। पोस्ट में उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलवाने और हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने से जुड़ा आरोप भी लगाया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद अयोध्या में विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नया दौर शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार के प्रयासों से रामनगरी अपने प्राचीन वैभव को फिर से प्राप्त कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए भव्य श्रीराम मंदिर, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, सुसज्जित रामपथ, विकसित घाटों और आधुनिक सुविधाओं का जिक्र किया। उन्होंने अयोध्या को आस्था और आधुनिकता के संगम के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि सोलर सिटी के रूप में विकसित होती रामनगरी अपने नए स्वरूप के साथ आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में 1.71 लाख दीपों के साथ शुरू हुई दीपोत्सव की यात्रा आज देश-दुनिया के करोड़ों रामभक्तों की श्रद्धा और उत्साह का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी रामभक्त दीप प्रज्ज्वलन का विश्व कीर्तिमान बनाने के लिए तैयार हैं।
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, दीपोत्सव उन पीढ़ियों के सपनों का उजास है, जिन्होंने अयोध्या को उसके त्रेतायुगीन स्वरूप में देखने की अभिलाषा संजोए रखी। उन्होंने दीपोत्सव को आस्था की विजय, सांस्कृतिक स्वाभिमान और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश का समापन ‘जय जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ किया।
Digital Desk: Liza Chandel
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