काशी के ऐतिहासिक घाटों और गंगा की अविरल धारा के ऊपर जब लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी, तो दोनों तटों पर मौजूद दर्शकों की निगाहें आसमान पर टिक गईं। विमानों की गर्जना, सटीक फॉर्मेशन और हैरतअंगेज हवाई करतबों के बीच तालियों की गूंज सुनाई देती रही। यह आयोजन भारतीय वायुसेना की परिचालन तत्परता, सटीक प्रहार क्षमता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की तैयारी को प्रदर्शित करने का अवसर बना।
एयर शो की शुरुआत भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन से हुई। हेलीकॉप्टरों ने सटीक तालमेल और नियंत्रित गति के साथ हवाई करतब दिखाए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वायुसेना प्रमुख और वायु योद्धाओं की ओर से अभिनंदन किया गया तथा उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया।
तीन एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की ‘ओंकार’ फॉर्मेशन ने राष्ट्रीय ध्वज और भारतीय वायुसेना के ध्वज के साथ उड़ान भरी। इसके बाद तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की ‘गंगा’ फॉर्मेशन ने आसमान से पुष्पवर्षा की। गंगा की धारा के ऊपर बरसते फूलों का दृश्य कार्यक्रम के खास आकर्षणों में शामिल रहा।
इसके बाद ‘रुद्र’, ‘भागीरथी’ और ‘त्रिदेव’ जैसी फॉर्मेशन के माध्यम से लड़ाकू विमानों, अटैक हेलीकॉप्टरों और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय की झलक दिखाई गई। इन प्रदर्शनों ने आधुनिक सैन्य अभियानों में तालमेल, निगरानी और परिचालन क्षमता के महत्व को रेखांकित किया।
एयर शो में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29 और अन्य विमानों ने अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरी। ‘विश्वनाथ’, ‘पशुपति’ और ‘नीलकंठ’ जैसी संरचनाओं के जरिए विमानों की गति, सटीकता और समन्वित उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया गया।
‘प्रचंड’ फॉर्मेशन में अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमानों को एक साथ उड़ान भरते देखा गया। इस प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना की विविध युद्धक क्षमताओं और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में मिशन पूरा करने की तैयारी की झलक पेश की।
एयर शो के प्रमुख आकर्षणों में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस का एकल प्रदर्शन रहा। तेजस ने नियंत्रित रोल, तीव्र मोड़ और कई रोमांचक हवाई करतबों के जरिए अपनी फुर्ती और उड़ान नियंत्रण क्षमता दिखाई। धीमी गति पर नियंत्रित उड़ान से लेकर तेज दिशा परिवर्तन तक, विमान के प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
तेजस का यह प्रदर्शन स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करने वाला रहा। इसके बाद मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल विमानों ने भी फॉर्मेशन और एरियल स्प्लिट जैसे करतब प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में काल्पनिक हवाई युद्ध का प्रदर्शन भी किया गया। इसमें विमानों के जरिए लक्ष्य की पहचान, पीछा करने और संभावित खतरे को रोकने जैसी परिस्थितियों को दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने हवाई अभियानों में पायलटों के प्रशिक्षण, सामरिक निर्णय और सेंसर से प्राप्त जानकारी के महत्व को सामने रखा।
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न लड़ाकू विमानों से जुड़ी आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी उल्लेख किया गया। ब्रह्मोस, स्कैल्प और अन्य मिसाइल प्रणालियों के संदर्भ में वायुसेना की अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों के विरुद्ध कार्रवाई करने की क्षमता को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख हुआ।
एयर शो के अंतिम चरण में सी-17 ग्लोबमास्टर और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने दर्शकों को रोमांचित किया। नौ हॉक विमानों की सूर्यकिरण टीम ने समन्वित उड़ान, फॉर्मेशन परिवर्तन, फ्लावर और बैरल रोल जैसे करतब प्रस्तुत किए। विमानों के बीच सटीक दूरी और तालमेल ने पायलटों के प्रशिक्षण तथा पेशेवर दक्षता की झलक दिखाई।
‘दशाश्वमेध’ फॉर्मेशन ने काशी की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक वायु शक्ति के संगम को दर्शाया। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और भारतीय सेनाओं के अधिकारी सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
गंगा के ऊपर आयोजित ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो ने भारतीय वायुसेना के 94 वर्षों के सफर, स्वदेशी तकनीक, सैन्य समन्वय और राष्ट्रसेवा के संकल्प को प्रदर्शित किया। काशी के आसमान में गूंजते विमानों और सूर्यकिरण टीम के करतबों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
Digital Desk: Liza Chandel
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