राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के निदेशक एवं सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी आदेश के अनुसार, साक्षर भारत योजना के तहत 31 मार्च 2018 तक कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों के अवशेष मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
आदेश में मानदेय भुगतान की दरें निर्धारित की गई हैं। इसके तहत प्रेरकों को 2,000 रुपये प्रतिमाह और जिला एवं ब्लॉक समन्वयकों को 6,000 रुपये प्रतिमाह की दर से बकाया मानदेय दिया जाएगा।
मानदेय जारी करने से पहले संबंधित कार्मिकों की वास्तविक उपस्थिति, कार्यों और उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर बकाया राशि का निर्धारण किया जाएगा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आवंटित धनराशि का इस्तेमाल केवल निर्धारित मद में ही किया जाएगा। इसे किसी अन्य मद में खर्च नहीं किया जा सकेगा। भुगतान संबंधित कार्मिकों के बैंक खातों के माध्यम से किया जाएगा।
संबंधित जिलों को 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार आवंटित धनराशि खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद व्यय का विवरण और उपयोगिता प्रमाण-पत्र 5 जनवरी 2027 तक निदेशालय को उपलब्ध कराना होगा।
आदेश में वित्तीय अनियमितता की स्थिति में संबंधित जनपदीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। इस व्यवस्था के तहत सत्यापन, निर्धारित समयसीमा और वित्तीय नियमों का पालन करते हुए साक्षरता कर्मियों के लंबित मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
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