मानसून की बेरुखी से राजस्थान में अकाल की पदचाप सुनाई देने लगी है। मानसून ने पहले दौर में अपना पूरा रूप दिखाया और भविष्यवाणियों का झुठलाता दिखाई दिया, लेकिन पिछले 27 दिनों से बारिश के नहीं होने से सूखे का असर दिखने लगा है। राज्य के अधिकांश जिलों में फसलों की स्थिति ठीक नहीं है। फसलों की गर्दन लटकने लगी है। बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, जोधपुर और नागौर से 4 सितंबर को और बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर से 8 सितंबर को मानसून रवाना हो गया है।अगले एक सप्ताह में बारिश की कोई संभावना भी नहीं है। जयपुर के साथ संभाग के अन्य जिलों अलवर, दौसा, झुंझुनूं में तो बारिश की स्थिति पहले से ही औसत से कम है। जालौर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू आदि जिन जिलों में अब तक असामान्य, अधिक या सामान्य बारिश बताई गई है, वो वहां के औसत के हिसाब से भले ही अधिक दिखती है, असल में वो अपर्याप्त बारिश ही है।अगर बारिश नहीं आई तो इस बार फिर से 2009 जैसे हालात हो सकते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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