मोबाइल टॉवर्स से निकलने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंगों का लोगों के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में गुरुवार को यह तथ्य अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने ‘मोबाइल टेलीफोनी में विद्युत चुम्बकीय उत्सर्जन और इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव’ विषय पर एक कांफ्रेंस में रखा। आईआईटी दिल्ली और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की इस संयुक्त कांफ्रेंस का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने किया और मोबाइल टॉवर्स से होने वाले उत्सर्जन पर एक दस्तावेज भी जारी किया। इस मौके पर रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि मोबाइल टॉवर विकिरण की भ्रामक चिंताओं से बेजोड़ मोबिलिटी के आगे बढ़ने की राह पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर हजारों अनुसंधान किए गए हैं और अभी तक मोबाइल टॉवर उत्सर्जन का मानव स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़े होने का कोई निर्णायक संबंध सामने नहीं आया है। कांफ्रेंस में यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिलवेनिया के अनुसंधानकर्ता डॉ. केनेथ आर. फोस्टर ने कहा कि रेडियो फ्रीक्वेंसी क्षेत्र, संभावित खतरों को लेकर सबसे अधिक अनुसंधान वाले क्षेत्रों में शामिल है। इस संबंध में दुनिया भर में अनेक शोध हुए हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी एजेंसियां ने इनकी कई बार समीक्षा भी की है। आमतौर पर सभी लोग इस बात पर सहमत हैं कि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय स्तर पर तय सीमा से नीचे के स्तर की फ्रीक्वेंसी ऊर्जा से मानव स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं होता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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