केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना की व्यवहार्यता को लेकर भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद ने सवालिया निशान लगाया है। आईआईएम की रिपोर्ट के मुताबिक बुलेट ट्रेन को मुंबई-अहमदाबाद के बीच हर रोज कम से कम 100 फेरे लगाने पड़ेंगे तभी यह मुनाफे की ट्रेन बन सकेगी। इशूज इन डेवलपमेंटश् शीर्षक रिपोर्ट संस्थान के पब्लिक सिस्टम समूह के प्रोफेसर जी रघुराम और प्रशांत उदयकुमार ने तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे को कर्ज और ब्याज समय पर चुकाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए ट्रेन संचालन शुरू होने के 15 साल बाद तक रेलवे को 300 किलोमीटर के लिए किराया 1500 रुपये रखना होगा। बता दें कि यह ट्रेन कुल 534 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। रघुराम ने कमाई का जो फार्मूला सुझाया है उसके मुताबिक यदि रेलवे को 100 रुपये की कमाई होती है तो 20-40 रुपये रखरखाव पर खर्च होंगे। इसके बाद बची राशि का इस्तेमाल कर्ज और ब्याज चुकाने के लिए किया जाएगा। इसके दो तरीके हो सकते हैं।
1. एक यात्री औसतन 300 किलोमीटर का सफर करे। इस लिहाज से रोजाना 88,000-118,000 यात्रियों की जरूरत होगी।
2. अमूमन एक ट्रेन में 800 यात्री सफर करते हैं, तो 88000 यात्रियों को ढोने के लिए 100 फेरों की जरूरत होगी। यानी एक तरफ से 50 फेरे। मतलब यह कि आवाजाही के लिए एक घंटे में तीन ट्रेनें चलानी होंगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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