गुजरात में 2002 के दंगों से जुडे गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार मामले में अन्य 68 लोगों के साथ मारे गये कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया जाफरी ने इस मामले में गुरुवार को आये विशेष अदालत के फैसले को अधूरा न्याय करार दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखनी पड़ेगी। उधर, इस हत्याकांड के दौरान बचे लोगों का पक्ष रखने वाले वकील एस एम वोरा ने इसे जाफरी की निजी राय बताते हुए कहा कि वह फैसले से संतुष्ट हैं। जाफरी, जिन्होंने लंबी कानूनी लडाई लड़ी थी और उसके बाद वर्ष 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था, ने आज के फैसले पर पर असंतोष जताया, जिसमें एसआईटी की विशेष अदालत के जज पी बी देसाई ने 60 जीवित आरोपियों में से 24 को दोषी तथा 36 को निर्दोष बताया था। उन्होंने पत्रकारों से कहा,‘इस फैसले से संतोष कैसे हो सकता है। 15 साल बीतने के बाद भी यह फैसला मिला तो कैसे संतोष होगा। मेरी लडाई खत्म नहीं हुई। अब वकीलों से राय लेनी पड़ेगी और फिर मुझे लडाई शुरू करनी पडेगी। जब तक जान में जान है तब तक लडेंगे। उन्होंने कहा, यह आधा अधूरा फैसला है। आधे से अधिक लोग छूट गये। मुझे लगता है कि एसआईटी ने सही तरीके से जांच नहीं की। वोरा ने कहा कि यह जाफरी की निजी राय है। वह अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं। हालांकि वह उन लोगों जिनके प्रति अदालत ने नरम रूख दिखाया है को भी कड़ी सजा देने के लिए अदालत से अनुरोध करेंगे पर वह यह नहीं कह सकते कि वह असंतुष्ट हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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