दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ टैंकर घोटाले की जांच शुरू होने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ सकती है। टैंकर घोटाले की जांच ने शीला दीक्षित की गुरुवार शाम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद लगी अटकलों पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। पार्टी नेता यह मानने लगे हैं कि मौजूदा स्थिति में उन्हें कोई जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। शीला दीक्षित की कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात के बाद यह अटकलें लगने लगी थीं कि उन्हें पंजाब का प्रभारी बनाया जा सकता है, क्योंकि 1984 के सिख विरोधी दंगों में भूमिका को लेकर पार्टी महासचिव कमलनाथ ने पंजाब के प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था। कई कार्यकर्ता शीला दीक्षित को उप्र चुनाव में पार्टी का चेहरा बनाने की भी वकालत कर रहे थे। पार्टी के एक नेता ने कहा कि एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) के टैंकर घोटाले की जांच शुरू करने के बाद वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित को कोई भी जिम्मेदारी सौंपना मुश्किल है, क्योंकि पंजाब का प्रभारी बनाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी। यूपी भेजे जाने पर भाजपा को भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल जाएगा। दरअसल, कमलनाथ के पंजाब प्रभारी पद से इस्तीफे के बाद शीला दीक्षित प्रभारी पद के लिए पार्टी की पहली पसंद बन कर उभरीं। इसकी वजह यह थी कि पंजाब से आने वाले ज्यादातर लोगों ने दिल्ली में बदलाव को देखा था। शीला दीक्षित पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखती हैं। सिख विरोधी दंगों के बाद दिल्ली में कांग्रेस की पहली मुख्यमंत्री बनीं और लगातार तीन बार चुनाव जीतीं।
Author: JAN TV Editorial Team
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