जितेंद्र ने ग़रीबी के चलते चाय की दुकान खोली थी। चाय बनाने का प्रशिक्षण लेना तो दूर की बात है। जितेंद्र ने वहां आए विदेशी सैलानियां से उनके देश की चाय बनाते देखा करते थे। देखते-देखते जितेंद्र ने 12 देशों की चाय बनाने में महारथ हासिल कर ली। अपने इसी हुनर और मेहनत ने जितेंद्र को मलेशिया का टिकट दिला दिया, दरअसल कुछ साल पहले मलेशिया के एक सैलानी जितेंद्र की चाय दुकान पर चाय पीने आए थे। इस दौरान दोनों की दोस्ती हुई और फ़ोन नंबर का आदान-प्रदान हो गया । और जितेंद्र को कई सालों बाद अचानक मैसेज आया कि तुम्हारा प्लेन का टिकट मेल कर रहा हूं। तुम्हें मलेशिया में वही स्वाद वाली भारतीय चाय को हमारे मेहमानो को पिलानी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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