सवालों के घेरे में नमामि गंगे परियोजना 
गंगा में डाला जा रहा है कचरा
(BIHAR, BIHAR) भारत की नदियों और ख़ास कर गंगा से आम भारतीय का पुरातनकाल से भावनात्मक लगाव रहा है। नरेंद्र मोदी सरकार ने नमामि गंगे परियोजना से मैली होती जा रही। गंगा के पौराणिक स्वरूप को लौटाने की एक महत्वकांक्षी परियोजना शुरू किया है। लम्बी तैयारिओं के बाद सरकार के दो साल पूरा होने के बाद 07 जुलाई को देश भर में गंगा के घाटों पर नमामि गंगे की शुरुआत की गई। हाजीपुर और सोनपुर में भी गंगा के घाटों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हाजीपुर में केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान तो सोनपुर में राजीव प्रताप रूढ़ि ने एक साथ गंगा के घाटों पर इस योजना का शुभारम्भ किया। लेकिन भव्य आयोजनों से शुरू इस योजना के शुरुआत के महज हफ्ते भर में ही इस इस महत्वकांक्षी योजना की सफलता पर सवाल खड़ा करने लगे है।
शुद्ध गंगाजल की पैकेजे के सरकार के फैसले पर जहां विपक्ष कई सवाल खड़े कर रहा है वही गंगा के घाटों की जमीनी हकीकत बेहद परेशान करने वाली तस्वीर पेश कर रही है। हाजीपुर में जिस जगह महज 07 दिन पहले केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने नमामि गंगे की शुरुआत की थी उससे महज चंद कदमो की दूरी पर दिन के उजाले में घरों से निकलने वाला मैला सीधे गंगा में डाला जा रहा है। टैंकरों से भरा शौचालय का मैला सीधे गंगा में डालने की तस्वीर बता रही है कि गंगा को साफ़ करने के दावों के सामने किस तरह की चुनौती है। टैंकरों में भरे मैले को जब हमारे कैमरे ने कैद किया तो टैंकर मालिक और ड्राइवर गाडी छोड़ फरार होने लगे। फिर कैमरे की नजर से बचने के लिए के लिए आनन फानन में गाडी लेकर भागने लगे। इस बिच जब ठेकेदार से नदी में सीधे मैला डालने की वजह जननी चाही तो जनाब हर पैंतरा आजमाने लगे।

Author: JAN TV Editorial Team

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