इस्लाम के विवादित प्रचारक जाकिर नाईक पर शिकंजा अब कसने ही वाला है. गृह मंत्रालय को कानूनी सलाह मिल गई है कि जाकिर नाईक पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत केस चलना चाहिए. मुंबई के डॉक्टर जाकिर नाईक के भाषणों की सरकार ने जांच कराई तो उनमें मिले हैं आतंक के जहर. सभी मुस्लिमों को आतंकवादी बनने का सबक सिखाता रहा था जाकिर नाईक अपने ऊपर मंडरा रहे खतरे को भांप चुका है, इसलिए देश लौटने के लिए तैयार नहीं है. पीस टीवी के जरिए बरसों से देश और दुनिया में कथिततौर पर आतंक का पाठ पढ़ा रहा था जाकिर नाईक. जाकिर नाईक का सच सामने आ चुका है. बांग्लादेश के ढाका के आतंकियों ने जाकिर नाईक को बेनकाब कर दिया कि जाकिर नाईक कैसे शांति दूत की खाल पहनकर आतंक का पालन पोषण कर रहा था.
जाकिर नाईक का जन्म 1965 में मुंबई में हुआ. मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जाकिर ने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी. इस संस्था का मकसद था गैर मुस्लिमों को इस्लाम का सही मतलब समझाना.इसी मकसद से जाकिर ने खुद दुनिया भर में घूम-घूम कर कुरान और इस्लाम पर लेक्चर देना शुरू कर दिया. जाकिर नायक पिछले 20 सालों में 30 से ज्यादा देशों में 2000 से भी ज्यादा सभाएं कर चुके हैं. जाकिर की सभाओं में खासी भीड़ जुटती है.
दुनिया भर में उनकी पहचान इस्लामिक धर्मगुरु की है. लेकिन, अपने कई बयानों की वजह से वो विवादों में रहे हैं. जाकिर ये दावा करते हैं कि उन्होंने सभी धर्मों के पवित्र ग्रंथों को पढ़ रखा है. अपनी सभाओं में वो लोगों को ये बताने से नहीं चूकते आगे कहा कि ‘जब एक डकैत पुलिसवाले को देखता है तो वो आतंकित होता है. डकैत के लिए एक पुलिसवाला आतंकी
Author: JAN TV Editorial Team
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