उन्होंने कहा कि विधि आयोग की 1987 की रिपोर्ट के अनुसार तब 40 हजार न्यायाधीशों की आवश्यकता थी, लेकिन आज भी न्यायाधीशों की संख्या सिर्फ 18000 है. सीजेआई ने कहा कि अगर हालात में सुधार नहीं होता है तो अगले 15-20 साल में लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी. ठाकुर ने कहा कि अगले पांच वर्षों में एक लक्ष्य निर्धारित करके नियुक्तियां की जा सकती हैं. ठाकुर ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के समक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है.
Author: JAN TV Editorial Team
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