न्यायपालिका और सरकार के बीच खींचतान के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने गुरुवार (1 दिसंबर) को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया ‘‘हाईजैक’’ नहीं की जा सकती और न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए क्योंकि ‘‘निरंकुश शासन’’ के दौरान उसकी अपनी एक भूमिका होती है। ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका न्यायाधीशों के चयन में कार्यपालिका पर निर्भर नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रशासन के मामलों में न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए जिसमें अदालत के भीतर न्यायाधीशों को मामलों को सौंपना शामिल है, जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं होगी, संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारी ‘‘बेमतलब’’ होंगे। प्रधान न्यायाधीश ठाकुर ने यह टिप्पणी ‘स्वतंत्र न्यायपालिका का गढ़’ विषयक 37वें भीमसेन सचर स्मृति व्याख्यान के दौरान कही। ठाकुर ने न्यायतंत्र से एकजुट होकर न्यापालिका की स्वतंत्रता को बचाए रखने के लिए एकजुट रहने के लिए कहा। ठाकुर ने कहा कि न्यायपालिका पर अंदर और बाहर से आक्रामकता का खतरा है और न्यायतंत्र को उसका एक सुर में विरोध करना चाहिए।
Author: JAN TV Editorial Team
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