भारतीय सैनिक सिपाही चंदू चव्हाण को पाकिस्तान रिहा कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने 21 जनवरी को दोपहर ढाई बजे उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया। यहां आने के बाद उनकी चिकित्सा जांच की गई। गौरतलब है कि भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद चंदू चव्हाण गलती से पाकिस्तानी सीमा में चले गए थे। वहां पर उन्हें बंधक बना लिया गया था। इसके बाद से उन्हें रिहा कराने की कोशिशें की जा रही थीं। 23 वर्षीय चंदू बाबूलाल महाराष्ट्र के धुले जिले के वोरबीर गांव के रहनेवाले हैं। उनके पिता का नाम बाशन चैहान है। वह 37वीं राष्ट्रीय रायफल के जवान हैं। उनके भाई भी मिलिट्री में ही हैं। उनकी तैनाती फिलहाल गुजरात में है पिछले दिनों रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा था कि 22 साल के भारतीय सैनिक चंदू चव्हाण को पाकिस्तान से सुरक्षित वापस लाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव भरे रिश्तों के मद्देनजर पाकिस्तान सरकार का यह कबूलनामा अहम है कि चव्हाण उनके कब्जे में है। इससे पहले, पाकिस्तानी थलसेना ने इस बात से इनकार किया था कि उसने किसी ऐसे जवान को पकड़ा है जो सितंबर में हुए लक्षित हमलों के बाद नियंत्रण रेखा गलती से पार कर गया था। चव्हाण 37 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान हैं। बाबूलाल ने 29 सितंबर को दोपहर के वक्त स्व्ब् पार कर ली थी। यह वही दिन था जब भारतीय डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने सर्जिकल स्ट्राइक के होने की बात कबूली थी। हालांकि, सेना ने यह भी साफ कर दिया था कि बाबूलाल का स्ट्राइक से कोई लेना देना नहीं था।
Author: Kamal
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