ईंट की भट्टीयों मे काम करते बाल मजदुर
(Bawal, Rewari) इस देश मे जंहा बच्चो की अच्छी शिक्षा की बात की जाती है, वहीं कुछ बच्चे ऐसे भी है जिन्हे ना ही अच्छी शिक्षा मिली है और ना ही अच्छा जीवन। सरकार बालदिवस पर अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन प्रकाशित करती है, जिसमें तमाम सरकारी योजनाओं का बखान किया जाता है, जिसमे प्रशासन बाल श्रम रोकने की प्रतिज्ञा लेता है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल ही जूदा है। आज लगभग सभी भट्टों पर वो मासूम काम कर रहे है जिन्हें इस उम्र में स्कूल में होना चाहिए था। इन बच्चों की बचपन की किलकारियां इस मिट्टी में दबकर ही रह गई है

सरकार ने बहुत सी योजनाएं चलाई लेकिन ये योजनाएं कागजों में सिमट कर रहा गई। अगर इन योजनाओं का लाभ बच्चों तक पहुंचता तो ये यूं मजदूरी ना कर रहे होते। इनको मजदूरी कर देख यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर कहा गए वो अधिकारी जो बालश्रम रोकने के बड़े-बड़े दावे करते है और कहा गई वो योजनाएं जिनका सरकार बड़े जोर-शोर से बखान करती है। जब श्रम विभाग के अधिकारियों से इस मामले पर संपर्क किया जाता है तो उन्हें बोलने मे हिचकिचाहट होती है। उन्होंने यह जरूर बताया कि इस विषय में आप बाल विकास अधिकारी से मिले। उन्होंने भी कार्यवाई करने के बजाये हमे रास्ता बता दिया। ऐसे में आप सहज अंदाजा लगा सकते है कि सरकार के ये सिपाही कैसे सरकार की योजनाओं का पालन कर रहे है

Author: Administrator

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।