भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक रह चुके लाल ने इस संबंध में अपना शोध पत्र सोमवार को भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) द्वारा आयोजित एक सेमिनार में पेश किया। शोध पत्र में पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर मनु के जल प्रलय को सरस्वती नदी के गायब होने से जोड़कर दिखाया गया है।
शोध पत्र में बताया गया है पुरातात्विक रूप से सरस्वती की भारी बाढ़ 2000-1,900 ईसा पूर्व के आसपास या मोटे तौर पर दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व के पहले चरण में आई। मनु के जल प्रलय का भी ठीक यही वक्त था जो ऋग्वेद के बाद आया। क्या अब भी हमें मनु के समय के आए जल प्रलय को काल्पनिक मानना चाहिए
पद्म सम्मान से नवाजे जा चुके लाल इसे लेकर एक किताब भी लिख रहे हैं। इसके पहले उनकी पुस्तक राम उनकी ऐतिहासिकता मंदिर और सेतु साहित्य पुरातत्व और अन्य विज्ञान को लेकर काफी हंगामा हुआ था क्योंकि उसमें अयोध्या की बाबरी मस्जिद के नीचे हिंदू मंदिर का ढांचा होने की बात कही गई थी।
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