एम्स ट्रॉमा सेंटर के चीफ अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब चेतन चीता के शरीर में कई गंभीर चोटें थीं। उनके शरीर से खून बह रहा था। दोनों हाथों में फ्रेक्चर था चेहरे में कई चोट थी और दाई आंख पर बुलेट इंजरी थी।
चीता का इलाज करने वाले डॉ अमित गुप्ता ने बताया कि उनके ब्रेन में इंजरी थी इसलिए उनके सिर का ऑपरेशन किया गया है। ये ऑपरेशन 15 फरवरी को किया गया। उन्होंने बताया कि उनकी सीधी आंख की आईबॉल में भी बुलेट इंजरी थी। इसकी वजह से उनकी आईबॉल में छेद था और उसका भी ऑपरेशन किया गया।
चीता को वेंटिलेटर पर रखा गया था। सांस लेने के लिए उनके गले में छेद किया गया था ताकि वह आसानी से सांस ले सके। उनके पैर में भी चोट थी। अब उन्हें स्पीच थेरिपी भी दी जा रही है ताकि वह सही से बोल सकें। उन्हें एक महीने तक आईसीयू केयर में रखा गया है।
कमांडेंड चीता का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि उनके इलाज के लिए 100 से ज्यादा का स्टॉफ लगा हुआ था। इसमें डॉक्टरों के अलावा अन्य स्टॉफ जैसे नर्स, टेक्नीशियन और ब्लड बैंक स्टॉफ के लोग शामिल थे। उन्होंने बताया कि कमांडेंड चीता के आत्मविश्वास के चलते वह इतनी जल्दी अस्पताल से वापस लौट सके। उन्होंने बताया कि अमूमन ऐसे मामलों में मरीज को दो महीनों से दो साल तक का समय लग जाता है।
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