जेल में बदल गए सोमाली लुटेरे सीखी हिन्दी खाने लगे दाल-चावल
(DELHI, DELHI) हमें सोमालिया वापस कब भेजा जाएगा। मुंबई की जेल में बंद 118 सोमाली समुद्री लुटेरे कोर्ट में पेशी के दौरान जब हिन्दी में अपनी बात रखते हैं तो सब चौंक पड़ते हैं। पर जेल में इन लुटेरों के साथ रहने वाले दूसरे कैदी और जेल अधिकारी जानते हैं कि ये बदलाव कैसे आया।

पिछले छह साल में इन कैदियों ने दूसरे कैदियों से हिन्दी बोलना सीखा है। वहीं जेल में ही इन्होंने ए से एप्पल और बी से बाल पढ़कर अंग्रेजी की कुछ लाइनें भी सीख ली हैं। मराठी बोलने में भी ये पीछे नहीं हैं। कभी भारतीय खाना इनके गले के नीचे नहीं उतरता था पर आज दाल-चावल इनका पसंदीदा है। भले ही दाल कितनी पतली हो चलेगा।

भारतीय नौसेना ने जनवरी, 2011 से अगले दो माह तक सोमाली समुद्री लुटेरों के खिलाफ अभियान छेड़ा था जिसमें 120 लुटेरे गिरफ्तार हुए थे। इनमें से दो की टीबी से मृत्यु हो गई। बाकी 118 को नवी मुंबई की जेल में रखा गया है। छह साल बाद इनका ट्रायल खत्म होने वाला है। इनमें से 50 को हत्या का दोषी ठहराया जा चुका है। कई रिहा हो सकते हैं और कई लुटेरों को बाकी की सजा पूरा करने के लिए उनके देश सोमालिया भी भेजा जा सकता है।


देश अब तक किसी एक मामले में इतनी बड़ी संख्या में विदेशी अपराधियों पर ट्रायल नहीं चला है। सुनवाई के दौरान जब आरोपी कोर्ट पहुंचते हैं तो खड़े होने की जगह नहीं बचती है।जब सोमाली लुटेरे जेल में लाए गए थे, तब इनके कपड़े फटे हुए थे और शरीर पर पुरानी मुठभेड़ के दौरान लगी गोलियों के निशान थे। ये यहां की भाषा भी बोल नहीं पाते थे इसलिए बाकी कैदियों के मन में इनके प्रति सहानुभूति रहती। टूथपेस्ट कपड़े से लेकर इन अशिक्षित कैदियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी साथी कैदियों ने संभाली। इनके मददगारों में मालेगांव ब्लास्ट और मुंबई ब्लास्ट के आरोपी भी थे।


एक सोमाली कैदी का कहना है कि वह जानता है कि उनका देश अकाल भूख और गरीबी से लड़ रहा है। हाल में सौ लोगों की भूख से मौत की खबर आई थी लेकिन अब वह अपनों के बीच जाना चाहता है।

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