100 साल चंपारण का सत्याग्रह देश का पहला सत्याग्रह है
(DELHI, DELHI) साल 1914 चंपारण के किसानों के लिए काफी अशुभ रहा। वजह यह थी कि औद्योगिक क्रांति के बाद नील की मांग बढ़ जाने के कारण ब्रिटिश सरकार ने भारतीय किसानों पर सिर्फ नील की खेती करने का दबाव डालना शुरू कर दिया। आंकड़ों की मानें तो साल 1916 में लगभग 21,900 एकड़ जमीन पर आसामावार जिरात और तीनकठिया प्रथा लागू थी। चंपारण के रैयतों से मड़वन फगुआही दशहरी सिंगराहट घोड़ावन लटियावन दस्तूरी समेत लगभग 46 प्रकार के कर वसूले थे और वह कर वसूली काफी बर्बर तरीके से की जाती थी।

निलहों के खिलाफ चंपराण के किसान राजकुमार शुक्ल की अगुवाई में चल रहे तीन साल के पुराने संघर्ष 1917 में मोहनदास करमचंद गांधी ने व्यापक आंदोलन का रूप दिया। दरअसल गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन के बाद चंपारण का सत्याग्रह देश का पहला सत्याग्रह था। सत्य की राह पर चलकर असत्य का विरोध करने जैसी प्रतिज्ञा तो उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में ही ले ली थी। अप्रैल 2017 को चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे हो रहे हैं।

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