वहीं ये फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है। हालांकि राष्ट्रपति उप-राष्ट्रपति प्रधानमंत्री चीफ जस्टिस और लोकसभा स्पीकर को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। दरअसल वीवीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए ये कदम उठाया गया है।
नियमों के मुताबिक 32 केंद्रीय मंत्रियों को लाल बत्ती इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है लेकिन राज्य में मंत्रियों के पास अधिक से अधिक लाल बत्ती की गाड़ियां हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है। पीएमओ से बातचीत के बाद ही सड़क परिवहन की ओर से ये कदम उठाया गया है।
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