आडवाणी तो निपट गए अब विपक्ष की बारी आएगी
(India) बाबरी विध्वंस मामले में सप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का सर्वाधिक राजनीतिक नुक़सान यदि किसी को होगा तो वह पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और पूर्व मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी को। जिन अन्य के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश का मुकदमा चलना है उनमें से कुछ राजनीतिक तौर पर उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं और कुछ की अभी पारी बाक़ी है।

प्रधानमंत्री बनने की सभी सम्भावनाएँ समाप्त होने के बाद भाजपा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य आडवाणी को उम्मीद थी कि जुलाई 2017 में उनके भी अच्छे दिन आ सकते हैं। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है इसलिए पार्टी की ओर से उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की उनकी इच्छा जायज़ भी थी।

इस घटनाक्रम के बाद लगता है उनकी यह इच्छा भी अब शायद ही पूरी हो पाए। शायद कहना इसलिए ज़रूरी है कि राजनीति में जब तक अंतिम फ़ैसला न हो जाए कुछ भी पक्का नहीं होता। कुछ लोगों ने तर्क दिया है कि भाजपा को इस फ़ैसले के बहाने 2019 तक अपने हिंदुत्व के अजेंडा को गरम रखने में मदद मिलेगी। सप्रीम कोर्ट ने दो साल के भीतर मामला निपटाने के निर्देश दिए हैं। मतलब अप्रेल 2019 से पहले इस पर फ़ैसला आ जाएगा। मई 2019 में लोकसभा के चुनाव होंगे और भाजपा इसे चुनाव में भुनाएगी। यह दूर की कौड़ी है, मगर इसे ख़ारिज नहीं कर सकते।

Digital Desk: Administrator

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।