फ्रेंच परिवार को गुरुद्वारे में डिनर के लिए खिचड़ी दी गई। इसके बाद एक पोस्टकार्ड के जरिए से उन्होंने अपने बातें लिखीं। उन्होंने लिखा, 'हम बारिश में खो गए थे। अंधेरे में ये गुरुद्वारा किसी लाइटहाउस की तरह आया है। परिवार ने लिखा कि न सिर्फ गुरुद्वारे ने रहने के लिए जगह दी, बल्कि बहुत अच्छी तरह से स्वागत भी किया। परिवार को दाल-खिचड़ी खाने को मिली। दादर सिंह सभा के वाइस प्रेसिडेंट कुलवंत सिंह का कहना है कि तकरीबन 750 बाढ़ पीडि़त लोग गुरुद्वारे में रहने के लिए आए थे। हमनें उन्हें खाने और रहने के लिए जगह दी। किसी भी तरह की दिक्कतें नहीं आने दी।
वहीं, वॉलंटियर में से एक मनप्रीत ने बताया कि परिवार काफी परेशान था। शहर का ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम पूरी तरह से खराब हो चुका था। किसी को भी रात गुजारने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिली। वे एक से दूसरे होटल जा रहे थे, तभी उन्हें गुरुद्वारे की ओर भेजा गया। गुरुद्वारे में आसरा लेने के बाद परिवार ने सुबह इसे अपनी जिंदगी की सबसे बेहतरीन रात बताया। इसके अगले दिन बुधवार को परिवार अपने देश वापस चला गया।
Author: JAN TV Editorial Team
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