इसके मुताबिक रोहताश नगर, दिलशाद कॉलोनी, ज्वाला नगर, पूर्वी आजाद नगर में प्रत्येक मोहल्ला क्लीनिक का किराया बीस हजार रुपये दिया जा रहा है। जबकि दिलशाद कॉलोनी में आठ से दस हजार रुपये, ज्वाला नगर में पांच से छह हजार रुपये किराये पर मकान आसानी से मिल रहे हैं। हैरत की बात यह है कि कृष्णानगर में 12,000 रुपये किराया दिया जा रहा है, जबकि मौजपुर में 18,000 रुपये। कृष्णानगर की तुलना में मौजपुर में किराया तीन गुने से भी कम है।
शाहदरा के पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह शंटी का कहना है कि मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर जनता का पैसा लूटकर आप अपने कार्यकर्ताओं को खुश कर रही है। यही नहीं मोहल्ला क्लीनिक के लिए किसी तरह की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। न तो टेंडर जारी हुआ। मोहल्ला क्लीनिक में मरीज का पहले पंजीकरण होता है। इसके बाद वह डॉक्टर के पास पहुंचता है। डॉक्टर उससे बीमारी पूछता है, फिर उसे चेक भी करता है। इसके बाद दवा लिखता है।
यह प्रक्रिया सामान्य मरीज के मामले में भी कम से कम पांच से छह मिनट का है। अगर डॉक्टर बिना रुके भी चार घंटे तक लगातार मरीज देखे तो भी आंकड़ा इतना ज्यादा नहीं हो सकता है। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष (निर्वाचित) डॉ. अश्विनी गोयल कहते हैं कि अगर आंकड़े सही हैं तो मरीजों के साथ धोखा किया जा रहा है। हर मरीज एक तरह का नहीं होता है। मरीजों को देखने में कम या ज्यादा का समय लग सकता है। लेकिन औसतन कभी भी दो मिनट का तो नहीं हो सकता।
हालांकि इसके लिए कोई दिशानिर्देश नहीं हैं, लेकिन आदर्श स्थिति में सामान्य मरीज को भी देखने में कम से कम पांच से छह मिनट का समय लग लगेगा। किसी-किसी मरीज को देखने में 15 से 20 मिनट का भी समय लग सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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