सीएम फड़णवीस ने कहा कि सालगिरह के मौके पर करीब तीन लाख लोगों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि इसके लिए पुलिस की छह कंपनियां तैनात की गई थ। लेकिन, कुछ लोगों ने माहौल को बिगाड़ा है। फड़णवीस ने कहा कि इस तरह की हिंसा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य सरकार ने मृतक के परिवारवालों को दस लाख रूपये मुआवजे के तौर पर देने का ऐलान किया है। इस हिंसा के बाद कई इलाकों में स्कूल, कॉलेज और ऑफिस को बंद रखने का ऐलान किया गया है। उधर, भीमा-गांव हिंसा की दलित नेता और केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के सीएम से बात की है। अठावलने ने कहा कि उन्होंने सीएम से जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि इस तरह की घटना दोबारा ना हो।
दरअसल, भीमा कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 को पुणे स्थित कोरेगांव में भीमा नदी के पास महार और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी। इसमें अंग्रेजों ने पेशवा द्वितीय के खिलाफ लड़ाई जीती थी। इस लड़ाई में सैनिकों के साथ कुछ महार भी शामिल थे। महार सैनिकों को उनकी वीरता और साहस के लिए सम्मानित किया गया और उनके सम्मान में भीमा कोरेगांव में स्मारक भी बनवाया, जिन पर महारों के नाम लिखे गए। इसके बाद से पिछले कई दशकों से भीमा कोरेगांव की इस लड़ाई का महाराष्ट्र के दलित जश्न मनाते आ रहे हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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