होम लोन का बीमा ऐसे कराएं
एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार 20 से 40 लाख तक का होम लोन लेता है और उसकी मासिक किस्त लोन की समयावधि के हिसाब से 20 से 50 हजार रुपये तक आती है। होम लोन प्रोटेक्शन स्कीम एक टर्म इंश्योरेंस की तरह है, यानी बीमा की अवधि आप खुद तय कर सकते हैं। बीमा की अवधि के हिसाब से आपका प्रीमियम तय होता है। अगर लोन लेने वाले की मृत्यु हो जाती है तो बाकी की किस्त इसी बीमा के जरिये जमा हो जाता है और आपका घर सुरक्षित रहता है। अन्यथा समय पर ईएमआई नहीं जमा करने पर बैंक आपके मकान को बाकी रकम की वसूली के लिए जब्त कर सकते हैं। अगर आपने होम लोन के लिए कोई गारंटी रखी है तो उसे भी बैंक भुना सकते हैं।
होम लोन की रकम और अवधि के साथ आपकी उम्र और कामकाज से तय होता है कि बीमा की राशि कितनी होगी औऱ उसका प्रीमियम कितना होगा। आपकी आज की आय और भविष्य में होने वाली आय पर भी निर्भर करता है। अगर आपने 20-25 लाख रुपये का लोन लिया है तो आपको एक या दो लाख रुपये बीमा के लिए देने पड़ सकते हैं। इसके लिए टर्म इंश्योरेंस की तरह सिर्फ एक बार प्रीमियम देना होता है। आप चाहें तो यह रकम अलग से दें या लोन की कुल राशि में जुड़वा लें और उस हिसाब से यह आपकी ईएमआई में से कटता रहेगा। हालांकि एकबारगी प्रीमियम देने वाले को सरेंडर की सुविधा भी कुछ शर्तों के साथ मिलती है। बैंकिंग के साथ बीमा सेवाएं देने वाले वित्तीय संस्थान होम लोन प्रोटेक्शन प्लान के ऑफर दे देते हैं।आप होम लोन की तरह इसके बीमा पर भी आयकर की धारा 80सी के जरिये आय़कर छूट का लाभ भी उठा सकते हैं। हालांकि अगर आपने होम लोन प्रोटेक्शन कवर का प्रीमियम भी बैंक से लोन ले रखा है तो यह आपकी ईएमआई में जुड़ेगा और आपको ज्यादा लाभ नही होगा।आप जिस बैंक से होम लोन लेते हैं, वह खुद लोन की मंजूरी के दौरान आपको प्रोटेक्शन कवर का ऑफर देते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि आप उसी बैंक से बीमा कवर भी लें, जिससे आपने होम लोन कराया है या करवाना हो। आप बाजार में तमाम कंपनियों के उपलब्ध प्रस्तावों का अध्ययन कर तय कर सकते हैं कि कौन आपको अच्छी सुविधा दे रहा है और कितनी किफायत में यह आपको मिल रहा है। आप चाहें तो प्रोटेक्शन कवर न भी लें, यह किसी भी तरीके से अनिवार्य नहीं है।
टर्म इंश्योरेंस से महंगा
होम लोन बीमा कवर हालांकि टर्म इंश्योरेंस से महंगा होता है। अगर आप पांच साल का टर्म इंश्योरेंस करवाते हैं तो होम लोन प्रोटेक्शन प्लान की तुलना में 30-40 फीसदी तक सस्ता होता है, लेकिन दोनों के अलग-अलग फायदे होते हैं। एक अंतर है कि होम लोन बीमा कवर सिर्फ पांच साल के लिए होता है और इसे दोबारा नवीनीकरण कराना पड़ता है। जबकि प्योर टर्म इंश्योरेंस प्लान ताउम्र काम करता है। अगर हम बीमा कवर को होम लोन में मिला देते हैं तो हमें उस पर भी ब्याज देना पड़ता है। टर्म इंश्योरेंस स्वाभाविक मृत्यु या योजना के एक साल बाद आत्महत्या के मामलों को भी कवर करता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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