कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से शेयर बाजार की तेजी थमी, Sensex 3 अंक और Nifty 20 अंक चढ़ा
(Mumbai, Mumbai) भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगभग सपाट बंद हुए। एक दिन पहले बाजार में जोरदार वापसी के बाद निवेशकों ने शुक्रवार को सतर्क रुख अपनाया।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार ऊंची बनी कच्चे तेल की कीमतों ने निवेशकों को किसी एक दिशा में आक्रामक दांव लगाने से रोके रखा। कारोबार के दौरान बाजार सीमित दायरे में ही घूमता रहा।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 77,725.67 के उच्च स्तर और 77,445.86 के निचले स्तर तक गया। इस दौरान इसमें 279.81 अंकों का उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 20.15 अंक यानी 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 24,252 पर बंद हुआ।

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में पावर ग्रिड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एनटीपीसी, बजाज फिनसर्व और एशियन पेंट्स बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर ट्रेंट, मारुति, इंटरग्लोब एविएशन और एचसीएल टेक पिछड़ने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।

बाजार विशेषज्ञ शरद कोहली ने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिम, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान नहीं निकलना बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की मजबूत खरीदारी और रुपये में मामूली सुधार से बाजार को कुछ सहारा मिला।

उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के बढ़ते तनाव को भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बताया। कोहली के मुताबिक बाजार में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के कारक मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल किसी भी दिशा में बड़ा ट्रिगर नहीं है। यही वजह है कि बाजार की स्थिति काफी हद तक स्थिर बनी हुई है।

कोहली ने कहा कि बाजार को तेजी या गिरावट के लिए एक बड़े ट्रिगर की जरूरत है। उन्होंने बताया कि नतीजों का सीजन भी समाप्त हो चुका है, इसलिए अब शेयरों में खास हलचल मुख्य रूप से खबरों और घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने गुरुवार को 583.36 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की।

इस बीच, वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.06 प्रतिशत बढ़कर 93.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि जापान का निक्केई 225 गिरावट में रहा। यूरोपीय बाजारों में भी मामूली तेजी के साथ कारोबार हुआ। वहीं, गुरुवार को अमेरिकी बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे।

इससे एक दिन पहले गुरुवार को सेंसेक्स में 628.04 अंकों यानी 0.82 प्रतिशत की जोरदार तेजी आई थी और यह 77,537.72 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद संभला था। निफ्टी 153.55 अंक यानी 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,231.85 पर बंद हुआ था।

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