दुर्ग निवासी विजय अग्रवाल की बेटी रूही की शादी 16 जनवरी 2007 को नेहरू नगर के निमिष अग्रवाल (38) से हुई थी। 7 मई 2016 को रूही ने सुपेला थाने में निमिष के खिलाफ दहेज मांगने की रिपोर्ट लिखाई। मामला कोर्ट पहुंचा। सुनवाई शुरू हुई। यहां न सिर्फ विवाहिता, बल्कि उसके पिता ने भी माना कि बतौर दहेज उन्होंने 2.50 करोड़ और फिर 60 लाख रुपए वर पक्ष के सदस्यों के खाते में जमा कराए हैं।
पति ने लगाई याचिका
नियम के मुताबिक, दहेज लेने के साथ ही दहेज देना भी गुनाह है। इसी को आधार बनाकर आरोपी पति ने कोर्ट में ससुरालवालों के खिलाफ याचिका लगा दी। इस पर मंगलवार को सुनवाई हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट डीके गिलहरे ने रूही और उसके पिता विजय अग्रवाल पर मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
पांच साल तक की हो सकती है सजा
दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 के तहत अगर कोई व्यक्ति दहेज देगा या लेगा या फिर दहेज देने-लेने के लिए दुष्प्रेरित करेगा तो इस नियम के तहत आरोपी होगा। आरोप सिद्ध होने पर कम से कम पांच साल की सजा और 15 हजार से दहेज की रकम तक दोनों में जो अधिक होगा, का जुर्माना होगा। यह गैर जमानती धारा है।
दहेज देने के आरोप में प्रकरण दर्ज करने का छत्तीसगढ़ में यह पहला मामला है। अभी तक राज्य में ऐसा मामला नहीं आया है। ऐसे आदेश से दहेज लेने और देने, दोनों मामलों में कमी आएगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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