प्रियंका गांधी भारतीय राजनीति में कांग्रेस के ‘पहले परिवार’ की बेटी हैं। खबरें और सुर्खियां उनका पीछा करती रहती हैं। कई लोग उनमें इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं। प्रियंका के जीवन में कई ऐसे मोड़ आए जो उनके साथ ही भारत की राजनीति के लिए भी अहम रहे हैं। प्रियंका की इस यात्रा पर डालते हैं एक नजर।
-12 जनवरी 1972 को दिल्ली में राजीव गांधी और सोनिया गांधी की दूसरी संतान के रूप में जन्म।
-16 साल की उम्र में पहला सार्वजनिक भाषण दिया।
-दिल्ली विश्वविद्यालय के जीसस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान में स्नातक की डिग्री ली।
-18 फरवरी, 1997 में राबर्ट वाड्रा से विवाह।
-बेटा रेहान और बेटी मिराया हैं।
-रोज एक घंटे के योग ने बदला गुस्सैल स्वभाव।
-व्यवहार की सौम्यता सबको आकर्षित करती है।
-दादी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राहुल और प्रियंका की पढ़ाई घर से ही।
-प्रियंका की तुलना इंदिरा गांधी से होती है। हेयरस्टाइल, कपड़े और बात करने के सलीके में दादी की छाप।
-बच्चों से खासा लगाव। राजीव गांधी फाउंडेशन के बेसमेंट में बच्चों के लिए लाइब्रेरी शुरू कराई।
-1999 के आम चुनाव में मां के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली का नियमित दौरा किया। लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया।
-2004 और 2009 के आम चुनावों में रायबरेली में मां की चुनाव अभियान प्रबंधक थीं और अमेठी में भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रबंधन में मदद की।
-2014 में राहुल गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ा तो प्रियंका ने भाई के लिए प्रचार किया।
-2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान प्रियंका के सक्रिय राजनीति में उतरने के कयास लगाए जा रहे थे।
कांग्रेस के सियासी फलक पर ऐसे उतरीं प्रियंका
करीब 28 साल पहले पिता राजीव गांधी की अंतिम यात्रा में आम लोगों के साथ चलकर देश की जनचेतना में पहली बार दस्तक देने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को उस वक्त अपनी सक्रिय सियासी पारी का आगाज कर दिया जब उन्हें कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया। गांधी-नेहरू परिवार की समृद्ध राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए प्रियंका सक्रिय राजनीति में कदम रखने से पहले करीब दो दशक तक राजनीतिक बारीकियों से रूबरू हुईं। लंबे समय तक सियासी गलियारों में इस पर चर्चा होती रही कि आखिर प्रियंका सक्रिय राजनीति में कब कदम रखेंगी और पार्टी में बड़ी भूमिका निभाएंगी।
उनके भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को बड़ा सियासी दांव खेलते हुए लोकसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले प्रियंका को कांग्रेस महासचिव और प्रभारी (उत्तर प्रदेश-पूर्व) नियुक्त किया और इसी के साथ सक्रिय राजनीति में प्रियंका के सफर का आगाज हो गया।
अभी तक 47 साल की प्रियंका खुद को कांग्रेस की गतिविधियों से अलग रखते हुए अपने परिवार के लिए काम करती रही हैं। उनका दायरा अब तक विशेष तौर पर मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्रों रायबरेली एवं अमेठी तक सीमित रहा है।
कई बार की हैं राहुल गांधी का खुलकर बचाव
कई मौकों पर अपने भाई राहुल गांधी का खुलकर बचाव करती आई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इसका उदाहरण भी देखने को मिला जब मोदी लहर के बीच भाजपा ने स्मृति ईरानी को अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव में उतारा तो प्रियंका ने अपने भाई के पक्ष में चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाल लिया और जीत सुनिश्चित की। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए गुजरात मॉडल पर तंज किया था।
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Author: JAN TV Editorial Team
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