लैब टेस्टिंग के बाद ही केस कंफर्म
मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक लैब में टेस्टिंग के बाद ही मंकीपॉक्स के केस को कंफर्म माना जाएगा। इसके लिए पीसीआर या डीएनए टेस्टिंग का तरीका ही मान्य होगा। अगर कोई संदिग्ध मामला आता है कि राज्यों और जिलों में बने इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के नेटवर्क के जरिए इसका सैंपल आईसीएमआर-एनआईवी के पुणे स्थित शीर्ष लैब में भेजा जाएगा। वहीं मंकीपॉक्स से पैदा हुए हालात से निपटने के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, उसके मुताबिक सभी इंतजाम महामारी विज्ञान के तहत किए जाने हैं। इसमें बीमार और उसकी देखभाल, डायग्नोसिस, केस मैनेजमेंट और रिस्क संबंधी फैक्टर्स पर ध्यान देने की बात कही गई है।
नए केस आएं तो पहचान में हो तेजी
मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों में देखभाल और नए केसों की तेजी से पहचान पर भी जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक बीमारी के पहुंचने पर रोक लगानी होगी। साथ ही इंफेक्शन रोकने और नियंत्रण के तरीकों के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। घर पर इंफेक्शन रोकने और उन्हें नियंत्रण करने, मरीज को आइसोलेशन में रखने और एंबुलेंस ट्रांसफर की रणनीति के बारे में भी जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि आइसोलेशन के दौरान किस तरह की सावधानी बरती जाए।
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