उम्र के लोगों मेंबेरोजगारी दर इस साल जनवरी-मार्चतिमाही मेंघटकर 6.8 प्रतिशत रह गई है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन
कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़ों के अनुसार एक साल पहलेइसी तिमाही मेंयह 8.2 प्रतिशत थी।
बेरोजगारी दर पिछलेसाल जनवरी-मार्चतिमाही मेंसबसेज्यादा थी। इसका मुख्य कारण देश मेंकोविड संबंधित बाधाएं थी।
सर्वेक्षण के अनुसार, बेरोजगारी दर पिछले साल जुलाई-सितंबर और अक्टूबर-दिसंबर में 7.2 प्रतिशत थी। वहीं अप्रैल-जून, 2022
में यह 7.6 प्रतिशत थी।
निश्चित अवधि पर होने वाले 18वें श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर अप्रैल- जून, 2022 में 7.6 प्रतिशत थी। आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं में बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च, 2023 में घटकर 9.2 प्रतिशत पर आ गयी जो एक साल पहले इसी तिमाही में 10.1 प्रतिशत थी।
वहीं पुरुषों में शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर इस साल पहली तिमाही में कम होकर छह प्रतिशत रही जो एक साल पहले 2022 की जनवरी-मार्च तिमाही में 7.7 प्रतिशत थी।
वित्तीय वर्ष 2022-23 की मार्च तिमाही में शहरी नौकरियों के लिए एकमात्र अच्छी तिमाही नहीं रही बल्कि सभी तिमाहियों के लिए
शहरी बेरोजगारी दर 2018-19 के बाद से 2022-23 में सबसे कम रही। नौकरियों में यह सकारात्मक रुझान इसलिए नहीं आया
कि कम लोग नौकरी की तलाश कर रहे थे बल्कि काम करने वाले या नौकरी की तलाश करने वाले लोगों की हिस्सेदारी - जिसे श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) कहा जाता है - सभी
तिमाहियों के लिए 2022-23 में सबसे अधिक रही।
इसका मतलब यह है कि 2022-23 में भारत की शहरी आबादी के रिकॉर्ड अनुपात में नौकरी मांगी और उन्हें नौकरी मिला। मार्च तिमाही में, LFPR 38.1% था जो शहरी बुलेटिन श्रृंखला में सबसे अधिक था।
Author: JAN TV Editorial Team
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