उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले का मठोली गांव अब “बहुओं का गांव” के नाम से जाना जाने लगा है — और इसकी वजह हैं यहां की वो महिलाएं, जिन्होंने समाज की पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर गांव को बदलने की ठानी। पहले जहां महिलाएं सिर्फ घर के काम तक सीमित थीं, अब वही महिलाएं गांव की योजनाएं बना रही हैं, सभाएं चला रही हैं और दूसरे गांवों के लिए मिसाल बन चुकी हैं।
मठोली गांव की बहुओं ने सबसे पहले मिलकर स्वच्छता अभियान शुरू किया। उन्होंने गांव की गलियों की सफाई की जिम्मेदारी खुद उठाई और प्लास्टिक कचरे को हटाने के लिए सभी घरों को जागरूक किया। इसके बाद उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया — स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए उन्होंने घर-घर जाकर माता-पिता से बात की और स्कूलों की हालत सुधारने में भी पंचायत का साथ दिया।
महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) बनाए हैं, जिनके ज़रिए वे अब घर में ही सिलाई, अचार बनाना, मशरूम उत्पादन और अन्य छोटे व्यवसाय कर रही हैं। इससे न केवल उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है, बल्कि उनके आत्मविश्वास में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।
एक खास बात यह भी है कि अब गांव में किसी नई योजना या सरकारी फैसले से पहले महिलाओं से सलाह ली जाती है। महिलाएं महिला मंडल की बैठकें आयोजित करती हैं और राशन, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, और बाल विकास जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा करती हैं।
मठोली गांव की महिलाएं आज एक नई सोच, नई ऊर्जा और नए नेतृत्व की मिसाल हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर महिलाओं को अवसर और मंच मिले, तो वे किसी भी गांव को तरक्की की राह पर ले जा सकती हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।