कहानी स्वाद की नहीं, संवेदना की है: कमलाथल — एक नाम नहीं, ममता की मिसाल
(India) सोचिए, जब सुबह 5 बजे हम में से कई लोग अलार्म बंद करके सो जाते हैं, उस वक्त तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में एक बुज़ुर्ग महिला चूल्हा जलाकर सैकड़ों भूखों के लिए इडली पकाना शुरू कर देती है। नाम है — कमलाथल, लेकिन सब उन्हें "इडली अम्मा" कहते हैं। वो कोई सोशल मीडिया सेलिब्रिटी नहीं हैं, ना ही उनके पास चमकदार ब्रांडिंग है — फिर भी उनके पास वो चीज़ है, जो आज की दुनिया में सबसे दुर्लभ हो गई है: बिना शर्त सेवा का दिल। पिछले 30 वर्षों से वो सिर्फ 1 रुपये में इडली खिलाकर उन लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला रही हैं, जिन्हें समाज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देता है। उस धुएं वाले चूल्हे पर बनी इडली में सिर्फ चावल नहीं, ममता पकी होती है। जब दुनिया ने लॉकडाउन में दरवाज़े बंद किए, अम्मा ने अपने दरवाज़े और दिल दोनों खोले रखे — उनके लिए जिनके पास न खाना था, न सहारा| जब कमलाथल के पास संसाधनों की कमी थी, तो उन्होंने वर्षों तक लकड़ी के चूल्हे पर धुएं में आंखें जलाकर खाना पकाया। लेकिन जब उनकी सेवा की कहानी देशभर में पहुँची, तो आनंद महिंद्रा ने उन्हें एक एलपीजी गैस कनेक्शन, पूरा किचन सेट और फिर एक नया घर भी उपहार में दिया। भारत पेट्रोलियम ने भी उनके इस मिशन को आसान बनाने के लिए ग्राइंडर और एलपीजी कनेक्शन प्रदान किया, जिससे उनकी मेहनत कुछ हद तक कम हो गई — मगर उनका समर्पण पहले जैसा ही रहा: "पेट से ज्यादा दिल भरना है।" ये कहानी इडली की नहीं, एक ऐसी आत्मा की है जिसने सिखाया कि दिल बड़ा हो तो बिना नाम, बिना पैसा, बिना मंच भी इंसान अमर बन सकता है। वो हमें ये एहसास कराती हैं कि इंसानियत के लिए ब्रांड नहीं, बस भावना चाहिए। और जब भावना सच्ची हो, तो सादगी ही सबसे बड़ी शक्ति बन जाती है।

Author: JAN TV Editorial Team

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