एक जनसभा में बोलते हुए बेनीवाल ने कहा, "जिला प्रशासन का मुखिया सरकारी योजनाओं और जनता के कामों को दरकिनार कर, कंपनियों के हित में फैसले ले रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो वह कलेक्टर नहीं, किसी कंपनी के मुनीम बन गए हों।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ निजी कंपनियों से अधिकारी की सांठ-गांठ है और सरकार की ओर से उन्हें लगातार संरक्षण दिया जा रहा है। सांसद ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों पर इतनी दरियादिली क्यों दिखा रही है, जो जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ रहे हैं।
बेनीवाल ने प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास कार्य ठप पड़े हैं, लेकिन कुछ खास प्रोजेक्ट्स को तेजी से मंजूरी मिल रही है, जो यह दर्शाता है कि प्राथमिकताएं तय करने में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही।
इस पूरे मामले ने जैसलमेर की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सांसद बेनीवाल ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो वे विधानसभा और संसद दोनों में आवाज़ उठाएंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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