नौतपा के दौरान तेज धूप, गर्म हवाएं और आसमान छूता तापमान लोगों की मुश्किलें बढ़ा देता है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि जो दौर पहले कुछ दिनों तक सीमित रहता था, वह अब लंबे समय तक चलने वाले गर्मी संकट में बदलता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरों में तेजी से बढ़ता कंक्रीट का फैलाव, पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक हरित क्षेत्रों में कमी के कारण गर्मी ज्यादा समय तक बनी रहती है। यही वजह है कि नौतपा खत्म होने के बाद भी तापमान सामान्य स्तर पर नहीं लौटता।
गर्मी का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ता है जो खुले में काम करने को मजबूर हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, सफाई कर्मचारी, कूड़ा बीनने वाले और दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं। अत्यधिक तापमान उनके स्वास्थ्य और आजीविका दोनों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए शहरों को दीर्घकालिक योजना अपनानी होगी। इसमें हरित क्षेत्रों को बढ़ाना, प्राकृतिक वायु मार्गों को सुरक्षित रखना, सार्वजनिक स्थानों को ठंडा बनाने की व्यवस्था और प्रभावी ‘हीट एक्शन प्लान’ लागू करना जरूरी होगा।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले वर्षों में गर्मियां और अधिक लंबी तथा तीव्र हो सकती हैं। ऐसे में अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि शहरों और समाज के सामने उभरती बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
Author: JAN TV Editorial Team
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