अल नीनो एक वैश्विक जलवायु पैटर्न है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया भर की मौसम प्रणालियों पर पड़ता है, जिससे कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, लू और अनियमित मानसून जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण एशिया उन क्षेत्रों में शामिल है जो इस प्रभाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
भारत में इस समय गर्मी का असर आम लोगों के जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। निर्माण श्रमिक, डिलीवरी कर्मी और खुले वातावरण में काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। वहीं रात के समय भी तापमान में पर्याप्त गिरावट नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि शहरों का अनियोजित विस्तार स्थिति को और खराब कर रहा है। कंक्रीट और डामर दिनभर गर्मी सोखते हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ते हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में ‘हीट आइलैंड इफेक्ट’ बढ़ता है। हरित क्षेत्रों की कमी और खराब भवन डिजाइन भी तापमान को नियंत्रित करने में बाधा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौसमी उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए दीर्घकालिक ‘हीट एक्शन प्लान’ की आवश्यकता है, जिसमें अधिक हरियाली, छायादार स्थान, जल संरक्षण, बेहतर शहरी नियोजन और मजदूरों सहित संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
जानकारों के मुताबिक भारत की चुनौती अब सिर्फ दिन की गर्मी तक सीमित नहीं है। बढ़ती गर्म रातें, गर्मी को रोककर रखने वाले शहर और जलवायु परिवर्तन का लगातार बढ़ता प्रभाव आने वाले वर्षों में और गंभीर संकट पैदा कर सकता है। ऐसे में जलवायु-अनुकूल विकास और पर्यावरण संरक्षण ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता माना जा रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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