हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघले, 2000 के बाद दोगुनी हुई रफ्तार; बढ़ा बाढ़ का खतरा
(India)


नेपाल में ग्लेशियर से जुड़े हादसे के बाद हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र में तेजी से पिघल रहे ग्लेशियरों को लेकर चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय संस्था ICIMOD की मार्च 2026 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2000 के बाद हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों के पिघलने की गति पहले की तुलना में करीब दोगुनी हो गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण इस पूरे पर्वतीय क्षेत्र में बर्फ और ग्लेशियरों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसका असर केवल पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एशिया के बड़े हिस्से में पानी की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।


ICIMOD के आकलन के मुताबिक, 1975 से अब तक हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र के ग्लेशियरों की बर्फ की मोटाई में 27 मीटर तक की कमी दर्ज की गई है।

इस क्षेत्र में 63,700 से ज्यादा ग्लेशियर मौजूद हैं। इन्हें ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर दुनिया के सबसे बड़े बर्फ भंडारों में गिना जाता है। इन्हीं ग्लेशियरों से निकलने वाला पानी एशिया की 10 प्रमुख नदियों के जल तंत्र का हिस्सा है।

इन नदियों पर करीब 200 करोड़ लोगों की पानी, कृषि, भोजन और आजीविका की जरूरतें निर्भर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 1990 से 2020 के बीच हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियरों के कुल क्षेत्रफल में करीब 12 प्रतिशत और बर्फ के कुल भंडार में लगभग 9 प्रतिशत की कमी आई।

रिपोर्ट में छोटे ग्लेशियरों को सबसे अधिक संवेदनशील बताया गया है। 0.5 वर्ग किलोमीटर से छोटे ग्लेशियर अपेक्षाकृत तेजी से खत्म हो रहे हैं और HKH क्षेत्र के करीब 75 प्रतिशत ग्लेशियर इसी श्रेणी में आते हैं।

इन ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से पहाड़ी इलाकों में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही ग्लेशियरों से बनी झीलों के अचानक फटने यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का खतरा भी बढ़ सकता है।

नेपाल में हाल की बाढ़ से जुड़े घटनाक्रम ने भी ग्लेशियर, भूस्खलन और अचानक आने वाले बाढ़ के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, किसी खास बाढ़ की घटना को सीधे पूरे क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने की दीर्घकालिक प्रवृत्ति से जोड़ने के लिए स्थानीय वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है।

विशेषज्ञों के सामने एक बड़ी चुनौती इस क्षेत्र में ग्लेशियरों की सीमित निगरानी और डेटा की कमी भी है। उपलब्ध आकलन के मुताबिक, पूरे हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में केवल 38 ग्लेशियरों की नियमित निगरानी हो रही है और इनमें से सिर्फ 7 वैश्विक मानकों के अनुरूप निगरानी व्यवस्था से जुड़े हैं।

कराकोरम, सिक्किम, जांस्कर और भूटान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ग्लेशियरों की स्थिति को लेकर पर्याप्त और लगातार अपडेट होने वाला डेटा उपलब्ध नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों को समझने, बाढ़ के जोखिम का अनुमान लगाने और भविष्य में पानी की उपलब्धता की बेहतर योजना बनाने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना आने वाले समय में दोहरी चुनौती पैदा कर सकता है। एक तरफ ग्लेशियरों के पिघलने से कुछ क्षेत्रों में अचानक पानी की मात्रा बढ़ने और GLOF जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है, तो दूसरी तरफ लंबे समय में ग्लेशियरों के सिकुड़ने से नदियों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

यही वजह है कि हिंदू कुश हिमालय में ग्लेशियरों का तेजी से बदलता स्वरूप सिर्फ पर्वतीय क्षेत्रों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए जल सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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