मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण ऐसे समय हुआ, जब समाज में असत्य और अन्याय का अंधकार था। उनके जन्म ने सत्य और धर्म के प्रकाश को प्रस्फुटित किया। योगी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन आज भी समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की दिशा दिखाता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल आनंद देने वाली कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश भी निहित हैं।
उन्होंने माखन चोरी की लीला का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें सहजता और निश्छलता का भाव दिखाई देता है। गोप-गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की आत्मीयता प्रेम, सहयोग और सामाजिक समरसता का संदेश देती है।
मुख्यमंत्री ने कालिय नाग के दमन को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन यह सिखाता है कि समाज की वास्तविक शक्ति सामूहिक सहयोग और एकजुटता में निहित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा के माध्यम से श्रीकृष्ण ने सामूहिक एकजुटता की शक्ति को भी सामने रखा। यह संदेश आज के समय में पर्यावरण संरक्षण और समाज के सामूहिक दायित्व के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
योगी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण किसी विशेष कुलीन वर्ग तक सीमित नहीं थे, बल्कि वह समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ आत्मीय संबंध बनाए और जरूरत के समय उनके साथ खड़े रहे।
मुख्यमंत्री ने द्वारकाधीश श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संबंध बताता है कि सच्ची मित्रता पद, प्रतिष्ठा या संपन्नता से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनती है।
उन्होंने कहा कि आज के समाज में भी समरसता, समानता और आत्मीयता की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण का जीवन लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा देता है। सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, प्रतिभाशाली और निपुण युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा किसानों को सहारा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। बेटियों को भी बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर देना लोककल्याण की इसी भावना का हिस्सा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के लिए कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का मार्ग बताया है। उनका संदेश किसी एक युग या समय तक सीमित नहीं है, बल्कि हर दौर में समाज का मार्गदर्शन करता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को अपने जीवन में उतारें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके संदेशों की पावन भूमि है। मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव सनातन सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों से इन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासतों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही विकसित और गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सत्य और धर्म के साथ खड़े रहने, अपने कर्तव्य का पालन करने और समाज के व्यापक कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा देता है। जन्माष्टमी का पर्व इसी संदेश को आत्मसात करने का अवसर है।
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